नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी सफलता के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का फोकस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 पर केंद्रित हो गया है। पार्टी के भीतर इस पूरे अभियान को “मिशन यूपी 2027” के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत संगठन और चुनावी रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी है।
जून से शुरू हो सकता है प्रदेशव्यापी दौरा
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह जून 2026 से उत्तर प्रदेश के दौरे की शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआती चरण में उनका फोकस बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र पर रहेगा। इसके बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर तक अन्य क्षेत्रों का क्रमवार दौरा प्रस्तावित है, जिसके दौरान पूरे प्रदेश की राजनीतिक स्थिति का गहन आकलन किया जाएगा।
बूथ स्तर तक संगठन की समीक्षा पर जोर
दौरे के दौरान अमित शाह स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे और जिलों से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति की समीक्षा करेंगे। साथ ही स्थानीय मुद्दों, जातीय समीकरणों और जमीनी राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रदेश को छह क्षेत्रों में बांटकर रणनीति तैयार
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को संगठनात्मक दृष्टि से छह क्षेत्रों—पश्चिमी यूपी, ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर और बुंदेलखंड—में विभाजित कर रखा है। इन्हीं क्षेत्रों के आधार पर चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक मजबूती की रणनीति को आगे बढ़ाया जा रहा है।
चार महीने में तैयार होगी बड़ी चुनावी रणनीति
सूत्रों के मुताबिक जून से सितंबर के बीच सभी छह क्षेत्रों का दौरा पूरा करने के बाद अक्टूबर से बूथ स्तर पर बढ़त सुनिश्चित करने की विस्तृत रणनीति पर काम शुरू किया जाएगा। इसे चुनावी तैयारियों का निर्णायक चरण माना जा रहा है, जिसमें संगठन की ताकत और चुनावी मैनेजमेंट दोनों पर फोकस रहेगा।
लोकसभा नतीजों के बाद नई रणनीति की जरूरत
राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट के बाद पार्टी नेतृत्व इसे गंभीरता से ले रहा है। इसी कारण 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति को और अधिक आक्रामक और ग्राउंड-लेवल बनाया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल मॉडल पर यूपी में प्रयोग की तैयारी
सूत्र बताते हैं कि भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनाई गई रणनीति को उत्तर प्रदेश में भी लागू करने पर विचार कर रही है, जहां क्षेत्रीय विभाजन कर अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले बिहार और महाराष्ट्र में भी इसी तरह की रणनीति को सफल माना गया था।
